मिसाइल स्टॉक घटने पर US की ताकत पर उठे सवाल, सहयोगियों में बढ़ी चिंता
· World · Hindustan Times, Wall Street Journal
ईरान के साथ जंग के कारण मिसाइल इंटरसेप्टर और हथियारों का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है, जिससे अमेरिकी सहयोगियों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या US एक साथ कई मोर्चों पर युद्ध लड़ने में सक्षम है। मित्र और विरोधी देशों के अधिकारियों का मानना है कि औद्योगिक गिरावट, रणनीतिक भ्रम और राजनीतिक अस्थिरता ने US को कमजोर कर दिया है। रणनीतिकार मैथ्यू क्रोनिग के मुताबिक, निवारक क्षमता ताकत और विश्वसनीयता दोनों पर टिकी होती है, और हथियार खत्म होने के बाद विरोधी देश यह मान रहे हैं कि US अब पहले जितना सक्षम नहीं रहा। राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास कम करने, चीन के प्रति नरमी बरतने और ताइवान को 14 अरब डॉलर की सैन्य बिक्री रोकने जैसे फैसलों ने इन आशंकाओं को और बढ़ा दिया है। इस बीच, मिडिल ईस्ट के संकट से निपटने के लिए अहम मिसाइल डिफेंस बैटरी और पैसिफिक क्षेत्र में बचा इकलौता एयरक्राफ्ट कैरियर भी वहां से हटा लिया गया है। यूरोपीय अधिकारियों को भी इस बात पर संदेह है कि रूस के हमले की स्थिति में US बाल्टिक देशों या जर्मनी की रक्षा के लिए अपनी सुरक्षा दांव पर लगाएगा।
ख़ास क्यों
मिडिल ईस्ट के संकट से निपटने के लिए जब US सेना के संसाधन और हथियार पैसिफिक और यूरोप से हटाए जा रहे हैं, तब यूरोपीय और एशियाई सहयोगियों के सामने सुरक्षा का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
मूल ख़बर पढ़ें — Hindustan Times
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