चीन के शॉक का नया मूल्यांकन, भारत पर क्या असर और आगे की राह?
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चीन के शीघ्र वैश्विक एकीकरण से उत्पन्न हुए "चीन शॉक" के प्रभाव पर नई रोशनी चमक रही है। पहले, यह नाम चीनी माल के तेज़ी से बढ़ते आयात के कारण विकसित देशों में नौकरी व कारखानों के बंद होने का संकेत देता था, और भारत में भी कई उद्योगों को सस्ते आयात से टक्कर का सामना करना पड़ा। पर अब चीन की आर्थिक वृद्धि धीमी होने और कोविड-19 जैसी घटनाओं के चलते वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में बदलाव के कारण "चीन शॉक" का परिदृश्य बदल रहा है। भारत के निर्माताओं को घरेलू उत्पादन बढ़ाने और चीनी माल पर निर्भरता घटाने के नए रास्ते तलाशने पड़ेगा।
ख़ास क्यों
भारतीय कारखाने और उपभोक्ताओं पर वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के बदलाव का प्रत्यक्ष असर है। "चीन शॉक" पर पुनर्विचार से भारतीय उद्योगों को नवाचार, उत्पाद गुणवत्ता बढ़ाने व नई बाज़ार खोलने के अवसर मिल सकते हैं।
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