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चीन के सस्ते सामान से बढ़ रही ग्लोबल टेंशन, भारत समेत दुनिया के सामने बड़ा संकट

· Business · Business Standard

चीन एक बार फिर दुनिया के बाजारों को अपने सस्ते मैन्युफैक्चरिंग सामानों से पाट रहा है, जिसे अर्थशास्त्रियों ने नए तरह का चाइना शॉक नाम दिया है। 2000 के दशक की शुरुआत जैसी इस लहर के उलट, यह उछाल इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी और सोलर पैनल जैसे हाई-टेक सेक्टरों में भारी सरकारी निवेश की वजह से आया है। चीन के भीतर घरेलू मांग कमजोर बनी हुई है, जिससे निर्माताओं को अपना अतिरिक्त उत्पादन बेहद कम कीमतों पर एक्सपोर्ट करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस रणनीति से व्यापारिक साझेदारों के साथ बड़ा तनाव पैदा हो गया है, जिनका कहना है कि सब्सिडी वाले सामानों की इस बाढ़ से उनके अपने घरेलू उद्योग खतरे में पड़ रहे हैं। US और EU की सरकारें इस अचानक आई आपूर्ति की बाढ़ से स्थानीय निर्माताओं को बचाने के लिए कड़ी जांच और संभावित व्यापार बाधाओं के साथ जवाब दे रही हैं।

ख़ास क्यों

चीन से सस्ते एक्सपोर्ट में यह तेजी स्थानीय कीमतों को गिराकर और औद्योगिक विकास को रोककर भारत और अन्य वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को कमजोर करने का खतरा पैदा करती है। यह नीति निर्माताओं को खुला व्यापार बनाए रखने या स्थानीय नौकरियों की सुरक्षा के लिए संरक्षणवादी उपाय लागू करने के बीच चयन करने के लिए मजबूर करती है।

मूल ख़बर पढ़ें — Business Standard

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