लीगल डेटाबेस पर नाम से सर्च जरूरी, दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी
· India · Indian Express, Hindustan Times
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि अदालती फैसलों को किसी व्यक्ति के नाम से खोजना बेहद जरूरी है और यह जनहित में है। जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस विनोद कुमार की खंडपीठ ने यह टिप्पणी इंडियन कानून की अपील पर सुनवाई के दौरान की। यह वेबसाइट मई के उस एकल पीठ के आदेश को चुनौती दे रही है, जिसमें आपराधिक मामलों में बरी या रिहा हुए लोगों के 'भूल जाने के अधिकार' (Right to be Forgotten) का हवाला देते हुए नाम से सर्च सीमित करने को कहा गया था। इंडियन कानून ने बताया कि वह शुरुआती आदेश का पालन करते हुए 80 से ज्यादा फैसले पहले ही हटा चुका है। अदालत ने कहा कि यूजर्स को याचिका नंबर या तारीख के आधार पर सर्च करने के लिए मजबूर करना लीगल डेटाबेस को लगभग अनुपयोगी बना देगा।
ख़ास क्यों
इस फैसले का असर आम नागरिकों, वकीलों और पत्रकारों पर पड़ेगा, जो अदालती रिकॉर्ड, पुराने फैसलों और मुकदमों के इतिहास को ट्रैक करने के लिए नाम के आधार पर सर्च करने की सुविधा पर निर्भर रहते हैं।
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