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दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 2008 की शादी रद्द करने की मांग खारिज

· India · Indian Express, The Hindu

दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2008 में हुई शादी को तोड़ने की पति की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने मई 2018 के फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। पति का दावा था कि आर्य समाज मंदिर में हुई शादी के दौरान उसे नशीला पदार्थ दिया गया था और धोखाधड़ी या जबरदस्ती से उसकी सहमति ली गई थी। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की बेंच ने कहा कि ऐसे आरोपों से शादी हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत शून्यकरणीय बनती है, जिसके लिए धोखाधड़ी का पता चलने के एक साल के भीतर याचिका दायर करनी होती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पत्नी के पक्ष में आए वैवाहिक अधिकारों की बहाली के आदेश के बाद पति ने साथ रहने की कोई कोशिश नहीं की। बेंच ने साफ किया कि हर महीने 10,000 रुपये गुजारा भत्ता देने से पति को तलाक का हक नहीं मिल जाता।

ख़ास क्यों

यह फैसला हिंदू कानून के तहत शादी की वैधता को चुनौती देने और सहमति से जुड़े मामलों में तय कानूनी समय सीमा को स्पष्ट करता है।

मूल ख़बर पढ़ें — Indian Express

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