BharatBriefly
Read less. Ask more.

Intelligent News Feed

Loading…

तमिलनाडु में DMK के आने से कैसे बदली राजनीति, 1967 के बाद जोर पकड़ा भ्रष्टाचार का मुद्दा

· India · The Hindu, Hindustan Times

साल 1952 की तमिल फिल्म पराशक्ति से लेकर 1967 में DMK के सत्ता में आने तक तमिलनाडु में भ्रष्टाचार के खिलाफ माहौल बनता गया। एम. करुणानिधि की लिखी इस फिल्म में कांग्रेस सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद 1957 में एस्टीमेट्स कमेटी ने सरकारी अस्पतालों में भ्रष्टाचार पर रिपोर्ट दी और 1962 में तत्कालीन वित्त मंत्री एम. भक्तवत्सलम ने भ्रष्टाचार रोकने के उपाय पेश किए। साल 1966 में DMK नेता वी.आर. नेदुंचेझियान के नेतृत्व में आए अविश्वास प्रस्ताव ने सरकार पर भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया और आंदोलन तेज कर दिया। आगे चलकर 1973 में जयप्रकाश नारायण ने मुख्यमंत्री करुणानिधि से मिलकर जीरो टॉलरेंस की नीति का समर्थन किया, जिससे भ्रष्टाचार के खिलाफ यह रुख और मजबूत हुआ।

ख़ास क्यों

तमिलनाडु की राजनीति में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह ऐतिहासिक रुख आज भी वहां की चुनावी संस्कृति और जनता की साफ-सुथरी शासन की उम्मीदों को तय करता है।

मूल ख़बर पढ़ें — The Hindu

टेलीग्राम पर जुड़ें
ब्रेकिंग न्यूज़ सबसे पहले। 10,000 सदस्य होने पर हम Android ऐप लॉन्च करेंगे।