विदेशी तेलों पर क्यों निर्भर है भारत? तिलहन उत्पादन और आयात की पूरी कहानी
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देश में तिलहन का पर्याप्त उत्पादन होने के बावजूद भारत खाने के तेल के लिए भारी आयात पर निर्भर है। कृषि क्षेत्र को छोटे खेतों, कम पैदावार और सिंचाई की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। धान और गेहूं पर सरकारी खरीद और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिलने के कारण किसान इनकी तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं। इसके चलते घरेलू मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बढ़ जाता है और पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी का तेल बड़ी मात्रा में विदेशों से मंगाना पड़ता है। हालांकि, उत्पादन बढ़ाने के लिए नीतियां और तकनीकें लाई जा रही हैं, लेकिन पुरानी अड़चनें विकास में रुकावट बनी हुई हैं।
ख़ास क्यों
आयात पर लगातार निर्भरता की वजह से देश के उपभोक्ताओं को वैश्विक बाजार में तेल के महंगे दामों का सामना करना पड़ता है और इससे आयात का खर्च भी बढ़ता है। घरेलू सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए नीति निर्माताओं और किसानों को पैदावार बढ़ाने और बाजार में सही प्रोत्साहन देने की जरूरत है।
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