विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने जुलाई में उपभोक्ता सेवाएँ, स्वास्थ्य और टिकाऊ वस्तु क्षेत्रों में बढ़ोतरी की, जबकि पूंजी वस्तुएँ और दूरसंचार से बाहर निकले।
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने जुलाई में भारतीय शेयर बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाई और उपभोक्ता सेवाओं, स्वास्थ्य व टिकाऊ वस्तु कंपनियों में भारी खरीदारी की। उसी दौरान उन्होंने पूंजी वस्तुओं और दूरसंचार के शेयरों की बिक्री की। विकास-उन्मुख सेक्टरों में शुद्ध खरीदारी ने इन क्षेत्रों की माँग बढ़ा दी, जबकि पूंजी वस्तु व दूरसंचार में बिक्री से जोखिम-से बचने की प्रवृत्ति दिखी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये प्रवाह आगे के महीनों में सेक्टर-वार स्टॉक कीमतों को दिशा देगा, और प्रभावित क्षेत्रों के निवेशकों व कंपनी प्रबंधकों ने इस रुझान पर कड़ी नजर रखी है।
ख़ास क्यों
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से उपभोक्ता सेवाओं, स्वास्थ्य और टिकाऊ वस्तु कंपनियों को पूँजी मिलेगी, जिससे उनके विस्तार योजनाओं को गति मिलेगी। दूसरी ओर पूंजी वस्तुएँ और दूरसंचार में निकासी इन शेयरों के मूल्यों पर दबाव डाल सकती है, जो निवेशकों और शेयरधारकों के लिए चिंता का कारण बनेगी।
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