फांसी की सजा बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने भविष्य में बदलाव की गुंजाइश छोड़ी
· India · Hindustan Times, Times of India
सुप्रीम कोर्ट ने 1983 के उस फैसले को सही ठहराया है जिसके तहत फांसी को मौत की सजा का कानूनी तरीका माना गया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने वरिष्ठ वकील ऋषि मल्होत्रा की याचिका खारिज कर दी, जिसमें फांसी को अनुच्छेद 21 का उल्लंघन बताया गया था। कोर्ट ने कहा कि अभी ऐसा कोई नया आधार नहीं है जिससे पुराने फैसले को बदला जाए, लेकिन भविष्य में वैज्ञानिक प्रगति के आधार पर इस पर दोबारा विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार चाहे तो अधिक मानवीय विकल्पों पर विचार कर सकती है, क्योंकि इस मामले में एक कमेटी पहले से ही काम कर रही है।
ख़ास क्यों
इस फैसले से यह साफ हो गया है कि फिलहाल दोषियों को फांसी ही दी जाएगी। हालांकि, कोर्ट ने सरकार को यह छूट दी है कि अगर भविष्य में वैज्ञानिक साक्ष्य मिलते हैं, तो वह फांसी की जगह किसी कम दर्दनाक तरीके को अपना सकती है।
मूल ख़बर पढ़ें — Hindustan Times
टेलीग्राम पर जुड़ें
ब्रेकिंग न्यूज़ सबसे पहले। 10,000 सदस्य होने पर हम Android ऐप लॉन्च करेंगे।