कर्मचारियों के विरोध के बाद हरियाणा में अलग कृषि DISCOM का प्रस्ताव टला
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बिजली कर्मचारियों के विरोध के कारण हरियाणा सरकार ने अलग कृषि DISCOM बनाने की अपनी योजना को टाल दिया है। यह कदम तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसी योजनाओं की तर्ज पर उठाया जा रहा था, जहां राज्य कृषि बिजली के बोझ को अलग कर मौजूदा DISCOM को सब्सिडी के भारी खर्च से बचाना चाहते हैं। देश की कुल बिजली खपत का करीब पांचवां हिस्सा कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होता है और इसे सबसे ज्यादा सब्सिडी मिलती है। CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में ऊर्जा सब्सिडी पर 1.9 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए। अकेले कृषि बिजली सब्सिडी ही वित्त वर्ष 2025 में 1.3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रही, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की DISCOMs पर फिलहाल 6.77 लाख करोड़ रुपये का घाटा और 7.11 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। इस भारी कर्ज के कारण DISCOMs नेटवर्क को अपग्रेड करने में असमर्थ हैं, जिससे अन्य उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
ख़ास क्यों
किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती बिजली की जरूरत होती है। सब्सिडी मिलने में देरी या DISCOM की वित्तीय बदहाली का सीधा असर किसानों की लागत पर पड़ता है, जिससे उनकी पैदावार भी प्रभावित हो सकती है।
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