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बड़ी क्षमता विस्तार से बच रही हैं भारतीय कंपनियां, छोटे निवेश पर जोर

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देश की कंपनियां पूंजीगत खर्च को लेकर सतर्क रुख अपना रही हैं। वे बड़े पैमाने पर क्षमता बढ़ाने के बजाय छोटे और चरणबद्ध निवेश पर ध्यान दे रही हैं। यह रणनीति वैश्विक और घरेलू स्तर पर मांग की अनिश्चितता के बीच बैलेंस शीट को संभालने के लिए अपनाई जा रही है। कई फर्म संचालन दक्षता सुधारने के लिए मौजूदा संपत्तियों के इस्तेमाल और तकनीक अपग्रेड करने को प्राथमिकता दे रही हैं। मौजूदा निवेश चक्र में नई परियोजनाओं के मुकाबले पुरानी इकाइयों के विस्तार को तरजीह दी जा रही है। ब्याज दरों और उपभोक्ता खर्च के रुख पर नजर रखते हुए कई औद्योगिक क्षेत्रों में यह बदलाव देखा जा रहा है।

ख़ास क्यों

चरणबद्ध खर्च की ओर इस झुकाव से औद्योगिक क्षमता बढ़ने की रफ्तार सुस्त हो सकती है, जिसका सीधा असर भारत में लंबे समय में रोजगार के सृजन और कुल आर्थिक उत्पादन पर पड़ेगा।

मूल ख़बर पढ़ें — Business Standard

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