भारत में इंजीनियरों की भरमार, फिर बेहतर क्वालिटी की दरकार क्यों?
· India · Indian Express, The Independent
साल 2000 के बाद से देश में इंजीनियरिंग शिक्षा का दायरा तेजी से बढ़ा है, जिससे भारी संख्या में ग्रेजुएट तैयार हो रहे हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सिर्फ डिग्री मिलने से छात्र जॉब मार्केट के लिए तैयार नहीं होते, जिससे पढ़ाई और रोजगार के बीच का अंतर साफ झलकता है। वहीं, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेडी के बयानों से भी इंजीनियरिंग की क्वालिटी पर सवाल उठे हैं। सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स की मांग के चलते देश में आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी और हजारों कॉलेज खुले हैं। हालांकि, जेनरेटिव AI के दौर में अब शिक्षा और मूल्यांकन के तरीके बदलने की जरूरत है, जिससे असमान परिणामों की चुनौती से निपटा जा सके।
ख़ास क्यों
इंजीनियरिंग की डिग्री और नौकरी के लायक होने के बीच का यह अंतर करोड़ों युवाओं, आईटी सेक्टर के टैलेंट पूल और टेक्नोलॉजी निर्यातक के रूप में भारत की स्थिति को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
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