भारत के बड़े निवेशकों का प्राइवेट क्रेडिट पर फोकस, पोर्टफोलियो डायवर्सिफाइ करने की रणनीति
· Business · Economic Times, Bloomberg
भारत के फैमिली ऑफिस और संस्थागत निवेशक पारंपरिक एसेट्स से आगे बढ़कर प्राइवेट क्रेडिट, वेंचर डेट और को-इन्वेस्टमेंट की तरफ पूंजी लगा रहे हैं। पब्लिक मार्केट के उतार-चढ़ाव से इतर रिटर्न पाने के लिए निवेशक इस रणनीति को अपना रहे हैं। प्राइवेट क्रेडिट जहां कंपनियों को स्ट्रक्चर्ड रिटर्न और तय शर्तों पर फंडिंग देता है, वहीं वेंचर डेट कम इक्विटी एक्सपोजर के साथ स्टार्टअप इकोसिस्टम में निवेश का मौका देता है। हालांकि, पब्लिक मार्केट के मुकाबले इन वैकल्पिक निवेशों में कड़ी ड्यू डिलिजेंस और लिक्विडिटी का ध्यान रखना जरूरी होता है। रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया गया है कि इन रणनीतियों के तहत कुल कितनी पूंजी लगाई जा रही है।
ख़ास क्यों
यह बदलाव बताता है कि देश के अमीर निवेशक पब्लिक मार्केट की अस्थिरता से बचने और अपनी संपत्ति बढ़ाने के लिए अब गैर-सार्वजनिक और विशेषज्ञता वाले निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
मूल ख़बर पढ़ें — Economic Times
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