हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और FII का रुख, भारतीय बाजार के लिए चुनौतियां और मौके
· Business · LiveMint, The Hindu
भारतीय शेयर बाजार इस समय विदेशी निवेशकों के बढ़ते रुझान और बाहरी दबावों के बीच संतुलन बना रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 87 अरब डॉलर हो गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में 67 अरब डॉलर था। हालांकि, विदेशी निवेशक हेल्थकेयर और कंज्यूमर सर्विसेज जैसे डिफेंसिव सेक्टर में पैसा लगा रहे हैं, वहीं 2026 में पहली बार IT सेक्टर में भी निवेश बढ़ा है।
ख़ास क्यों
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और बढ़ता व्यापार घाटा सीधे तौर पर कंपनियों के मुनाफे और आम लोगों के खर्च पर असर डालता है। वैश्विक सप्लाई चेन में किसी भी तरह की बाधा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर सकती है।
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