भारतीय फार्मा सेक्टर में दिखी दोहरी चाल, कहीं मुनाफा तो कहीं चुनौती
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भारतीय फार्मा उद्योग इस वक्त दो अलग-अलग रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। जहां कुछ कंपनियां रेगुलेटेड बाजारों में मजबूत मांग का फायदा उठा रही हैं, वहीं कुछ को कीमतों के दबाव और सरकारी नियमों की सख्ती का सामना करना पड़ रहा है। घरेलू बाजार में पुरानी बीमारियों की दवाओं और जरूरी दवाओं की मांग के चलते स्थिति स्थिर है। इसके उलट, निर्यात करने वाली कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और बदलते क्वालिटी मानकों के बीच काम कर रही हैं। यह रुझान बताता है कि कंपनियां अब केवल वॉल्यूम बढ़ाने के बजाय वैल्यू-एडेड इनोवेशन पर ज्यादा जोर दे रही हैं।
ख़ास क्यों
फार्मा सेक्टर में निवेश करने वालों के लिए इस अंतर को समझना जरूरी है। कंपनियों की कमाई और उनकी लॉन्ग-टर्म वैल्यू इस बात पर निर्भर करेगी कि उनका कारोबार घरेलू बाजार पर ज्यादा आधारित है या अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर।
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