झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 2006 के कैदी फरार मामले में जेल वार्डन बरी
· India · Indian Express, Hindustan Times
झारखंड हाईकोर्ट ने 2006 के एक विचाराधीन कैदी के फरार होने के मामले में मुख्य वार्डन को बरी कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आंतरिक जेल मैन्युअल के नियमों के उल्लंघन के आधार पर बिना ठोस सबूत के आपराधिक दायित्व तय नहीं किया जा सकता। जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने पांच साल की सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर यह फैसला सुनाया। नवंबर 2005 में रांची की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल से लोहरदगा मंडल कारा भेजे गए हत्या के आरोपी के भागने के बाद यह मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष वार्डन और कैदी के बीच मिलीभगत का कोई सबूत पेश नहीं कर पाया।
ख़ास क्यों
यह फैसला स्पष्ट करता है कि न्यायिक कार्यवाही में आपराधिक मंशा के पुख्ता सबूत के बिना केवल जेल मैन्युअल के नियमों के उल्लंघन को आपराधिक साजिश नहीं माना जा सकता।
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