कश्मीरी सेबों के लिए एनएच-44 पर ग्रीन कॉरिडोर की मांग, किसानों को बड़े नुकसान का डर
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कश्मीर के सेब उत्पादक दिल्ली की मंडियों तक फसल समय पर पहुंचाने के लिए नेशनल हाईवे-44 पर एक समर्पित ग्रीन कॉरिडोर की मांग कर रहे हैं। 2025 के मानसून सीजन में भूस्खलन और हाईवे बार-बार बंद होने से इस सेक्टर को 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ था, जिसके बाद यह मांग उठी है। अनंतनाग के सेब किसान रियाज अहमद खान का कहना है कि उन्होंने गाला सेब की तुड़ाई पूरी कर ली है, लेकिन उन्हें डर है कि हाईवे अक्सर बंद होने के कारण वे समय पर राजधानी नहीं पहुंच पाएंगे। सोपोर फ्रूट मंडी और कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का अनुमान है कि घाटी से रोजाना 400 से 500 फल लदे ट्रक रवाना होते हैं और तुड़ाई अपने चरम पर पहुंचने पर यह संख्या और बढ़ सकती है। संगठनों का कहना है कि फल वाले ट्रकों के लिए तय समय स्लॉट वाला ग्रीन कॉरिडोर होने से ट्रैफिक चलता रहेगा और फसल खराब होने से बचेगी।
ख़ास क्यों
सेबों की समय पर ढुलाई न होने से फसल खराब होने और हजारों किसानों को आर्थिक नुकसान का जोखिम है, साथ ही उत्तरी बाजारों में ताजे फलों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
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