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मुजफ्फरनगर कोर्ट का बड़ा फैसला, 100 दिनों में 17 लोगों को मौत की सजा

· India · Indian Express, India Today, NDTV

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर ने 6 अप्रैल से 17 जुलाई के बीच सात अलग-अलग हत्या के मामलों में 17 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है। यह आंकड़ा साल 2025 में पूरे उत्तर प्रदेश की निचली अदालतों द्वारा सुनाई गई कुल मौत की सजाओं से भी ज्यादा है। सत्र अदालत के इन फैसलों पर हाई कोर्ट की मुहर लगना अनिवार्य है। एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2016 से हाई कोर्ट ने ऐसी सिर्फ दस फीसदी सजाओं की पुष्टि की है। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत निचली अदालतों के लिए सजा सुनाने से पहले आरोपी की मानसिक स्थिति, जेल के आचरण और पृष्ठभूमि की रिपोर्ट देना अनिवार्य है।

ख़ास क्यों

एक ही अदालत द्वारा इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में मौत की सजा सुनाना राष्ट्रीय रुझानों से अलग है। साथ ही, यह सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनिवार्य पालन पर भी सवाल खड़े करता है।

मूल ख़बर पढ़ें — Indian Express

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