इन्फ्रास्ट्रक्चर में प्राइवेट कैपिटल का सीमित दायरा, बढ़े रेगुलेशन और फाइनेंसिंग की लागत
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बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, प्राइवेट सेक्टर का इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश सीमित दायरे में आ गया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह बढ़े हुए रेगुलेटरी आवश्यकताओं और उच्च फाइनेंसिंग लागत के कारण हुआ है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ये बाधाएँ कब कम होंगी, इसका कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाली ये बाधाएँ विभिन्न क्षेत्रों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप प्रोजेक्ट्स को धीमा कर सकती हैं।
ख़ास क्यों
यह सड़कों, बंदरगाहों और ऊर्जा ग्रिड जैसे महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को देरी कर सकता है, जिससे आर्थिक वृद्धि और रोजगार पर असर पड़ेगा। देरी से होने वाले प्रोजेक्ट्स से पब्लिक फंड्स पर दबाव बढ़ सकता है या प्राइवेट सेक्टर के निवेशक पीछे हट सकते हैं।
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