शांति एक्ट और मुआवजा: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा स्पष्टीकरण
· India · The Hindu, Indian Express
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि परमाणु हादसे के बाद क्या अदालतें पीड़ित को कानून में तय तीन हजार करोड़ रुपये की सीमा से ज्यादा मुआवजा दे सकती हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi और न्यायमूर्ति V. Mohana की बेंच ने यह भी सवाल उठाया कि Atomic Energy Regulatory Body यानी AERB के सदस्यों के चयन के लिए Atomic Energy Commission द्वारा बनाई गई समिति में हितों के टकराव की स्थिति बन सकती है। यह याचिका पूर्व नौकरशाह EAS Sarma और कुछ वैज्ञानिकों व शिक्षाविदों ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन करता है। अदालत ने कहा कि संसद की तरफ से तय मुआवजे की सीमा अदालतों को सही मुआवजा देने से नहीं रोकती, लेकिन चयन प्रक्रिया और हितों के टकराव पर जवाब मांगा है। शांति एक्ट ने साल 2010 के नागरिक दायित्व कानून की जगह ली है, जिसके तहत निजी कंपनियां परमाणु संयंत्र बना सकती हैं और उनका मुआवजा सीमित किया गया है।
ख़ास क्यों
यह फैसला तय करेगा कि देश में परमाणु हादसे के पीड़ितों को कानून में तय सीमा से ज्यादा मुआवजा मिल सकता है या नहीं। साथ ही, इससे परमाणु नियामक संस्था की नियुक्तियों में पारदर्शिता और निवेशकों के भरोसे पर भी असर पड़ेगा।
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