सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही को गलत तरीके से पेश करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
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सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें न्यायपालिका की आलोचना और सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही को तोड़-मरोड़कर पेश करने के बीच अंतर स्पष्ट करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता राजा चौधरी ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अदालती बहस के क्लिप्स और मीम्स के जरिए जजों के बयानों को गलत तरीके से दिखाया जाता है। जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि न्यायिक फैसलों की आलोचना हो सकती है, लेकिन जो शब्द कहे ही नहीं गए, उन्हें लेकर जज को निशाना बनाना गलत है। कोर्ट ने फिलहाल केंद्र सरकार के जवाब का इंतजार करने को कहा है।
ख़ास क्यों
इस मामले में आने वाला फैसला अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया पर कानूनी चर्चाओं के लिए नए दिशा-निर्देश तय कर सकता है। यह फैसला डिजिटल युग में न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने और गलत सूचनाओं को रोकने के लिहाज से बेहद अहम है।
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