दफ्तरों में एल्गोरिदम तय कर रहे काम, कर्मचारियों की बढ़ रही मुश्किलें
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मॉडर्न वर्कप्लेस और गिग इकॉनमी में इंसानी मैनेजर्स की जगह तेजी से ऑटोमेटेड सिस्टम ले रहे हैं। ये एल्गोरिदम रियल-टाइम डेटा के आधार पर कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी ट्रैक करते हैं, टास्क अलॉट करते हैं और परफॉरमेंस रेटिंग तय करते हैं। समर्थक इसे एफिशिएंसी बढ़ाने वाला मानते हैं, तो आलोचकों का कहना है कि फैसलों में पारदर्शिता नहीं होती।
ख़ास क्यों
कंपनियों के इस रुख से कर्मचारियों की ऑटोनॉमी घट रही है और ऑटोमेटेड सिस्टम के फैसलों के खिलाफ अपील करने का कोई ठोस जरिया नहीं बचा है।
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