खामेनेई की मौत के बाद ईरान से बातचीत के लिए ट्रंप ने बरजानी को बनाया जरिया
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डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ युद्ध खत्म करने की कोशिशों के दौरान इराक के कुर्दिस्तान राष्ट्रपति नेचिरवन बरजानी का इस्तेमाल बैकचैनल के तौर पर किया। अमेरिका ने ईरान के आधिकारिक वार्ताकारों को दरकिनार कर दिया क्योंकि उन्हें शक था कि उनके पास IRGC को मनाने का अधिकार नहीं है। मई की शुरुआत में व्हाइट हाउस को लगा कि आधिकारिक वार्ताकारों की बात नहीं मानी जा रही है, जिसके बाद बरजानी से संपर्क किया गया। बरजानी को उनके तेहरान के साथ पुराने संबंधों और फारसी भाषा पर पकड़ के कारण चुना गया था। हालांकि, दोनों देशों के बीच बना समझौता जल्द ही टूट गया।
ख़ास क्यों
यह घटना बताती है कि तेहरान में असली ताकत किसके हाथ में है, यह पहचानना अमेरिका के लिए कितनी बड़ी चुनौती है। यह भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली किसी भी शांति वार्ता को और जटिल बना सकता है।
मूल ख़बर पढ़ें — Times of India
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