क्या आप जानते हैं ऐप्स कैसे रखते हैं आपकी हर गतिविधि पर नजर?
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स्मार्टफोन ऐप्स यूजर की स्क्रॉलिंग स्पीड, वाई-फाई या मोबाइल नेटवर्क, सर्च हिस्ट्री और सोशल शेयरिंग जैसी जानकारियों को जोड़कर एक डिटेल प्रोफाइल तैयार करते हैं। इस डेटा का इस्तेमाल विज्ञापन कंपनियां करती हैं ताकि यूजर्स को उनकी पसंद के उत्पाद और सेवाएं दिखाई जा सकें। एंड्रॉइड डिवाइस में एक खास आईडी होती है जो डिफ़ॉल्ट रूप से चालू रहती है, जबकि आईफोन में ऐप ट्रैकिंग ट्रांसपेरेंसी (ATT) के जरिए डेटा शेयर करने से पहले अनुमति मांगी जाती है। डिवाइस लेवल पर ट्रैकिंग आईडी को ब्लॉक करना डेटा इकट्ठा होने से रोकने का सबसे असरदार तरीका है। यूजर्स फोन की सेटिंग्स में जाकर ऐप्स की फालतू परमिशन बंद कर सकते हैं और समय-समय पर प्राइवेसी सेटिंग्स की जांच कर सकते हैं।
ख़ास क्यों
भारतीय स्मार्टफोन यूजर्स के लिए टारगेटेड विज्ञापन खरीदारी के फैसलों को प्रभावित करते हैं और बिना सहमति के पर्सनल डेटा का खुलासा करते हैं। ट्रैकिंग के इन तरीकों को समझना यूजर्स के लिए अपनी प्राइवेसी बचाने के लिहाज से बेहद जरूरी है।
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